What is STP in Mutual Fund 2021 in Hindi | Mutual Fund STP Kya Hai?

by Rahul Gupta
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What is STP in Mutual Fund 2021 in Hindi

What is STP in Mutual Fund 2021 in Hindi | Mutual Fund STP Kya Hai?

STP in Mutual Fund – हमने अपने पिछले आर्टिकल्स में देखा की म्यूच्यूअल फंड में निवेश के बहुत से विकल्प है जैसे SIP, या लम्पसम/एकमुश्त। लेकिन आजकल जहाँ महामारी का दौर चल रहा है निवेशक एकमुश्त निवेश करने से थोडा पीछे हट रहे है इसका कारण है इससे जुड़े संभावित जोखिम। यही कारण है कि वित्तीय विशेषज्ञ जोखिमों को कम करने के लिए Systematic Transfer Plans की सलाह देते हैं। हमने इस पोस्ट में इसे विस्तृत रूप से समझाने के कोशिश की है, तो चलिए जानते है की Systematic Transfer Plans क्या होते है ये कैसे काम करते है –

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) फुल फॉर्म

STP Full form – STP का फुल फॉर्म है Systematic Transfer Plan, सिस्टेमेटिक ट्रान्सफर प्लान। 

म्यूच्यूअल फंड सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) क्या है?

What is STP in Mutual Fund /what is systematic transfer plan – जैसा की लगभग हर निवेशक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के बारे में जानता है । लेकिन अभी  भी सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (Systematic Transfer Plan) या एसटीपी के बारे में कम ही लोग जानते है? या जानते भी होंगे तो इसे कभी उपयोग में नही लाये होंगे।  जैसा कि हम जानते है जहां एसआईपी में हमारे सेविंग्स अकाउंट से पैसा म्यूच्यूअल फंड स्कीम में ट्रान्सफर होता है निवेश के लिए, वहीं एसटीपी का मतलब समान फंड हाउस के एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरे स्कीम में आपका पैसा ट्रान्सफर करना होता है। एसटीपी जोखिम को कम करने और रिटर्न को संतुलित करने के लिए एक विशिष्ट अवधि में आपके निवेश को कम करने की एक स्मार्ट रणनीति है।

यह हस्तांतरण समय-समय पर होता है, जिसमे निवेशकों के फंड को एक स्कीम से बदलकर दूसरी स्कीम में उच्च रिटर्न की प्राप्ति के लिए निवेश किया जाता है। यह बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान एक निवेशक के हितों की रक्षा करता है, ताकि होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। एसटीपी चुनने का प्राथमिक लाभ फंड ट्रांसफर और उपयोग की सुव्यवस्थित प्रक्रिया है। चूंकि धन स्वचालित रूप से चयनित फंडों के बीच समायोजित हो जाता है, जिससे निवेशक उपलब्ध संसाधनों के  कुशल आवंटन से उच्च रिटर्न का लाभ उठा सकते हैं।

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सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) कैसे काम करता है?

How does STP work/STP Kaise Kaam Karta Hai – एसटीपी और मार्किट की अस्थिरता का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए, पहले एकमुश्त राशि को शुरू में अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म डेट फंड और/या लिक्विड फंड में निवेश किया जाता है। यह राशि व्यवस्थित रूप से -मासिक या त्रैमासिक अवधि में – आपकी पसंद के इक्विटी-ओरिएंटेड फंड में ट्रान्सफर की जाती है (लेकिन आदर्श रूप से जो लंबी अवधि के धन सृजन के योग्य साबित हो सकती है)।

यदि आप आज लिक्विड फंड में निवेशित रहना पसंद करते हैं, लेकिन आगे जाकर आप इक्विटी में धीरे-धीरे निवेश करना चाहते हैं, तो आप निश्चित रूप से म्यूचुअल फंड द्वारा पेश किए गए एसटीपी विकल्प को चुन सकते हैं। इसी तरह, यदि आप उम्मीद करते हैं कि बाजार सुधार के दौर से गुजरेगा,  तो आप इस समय भी एसटीपी का स्मार्टली उपयोग कर सकते है जिसमे आप इक्विटी म्यूचुअल फंड से धीरे-धीरे विनिवेश करना चालू करेंगे,  जिसमे आप अपने इक्विटी फंड से एसटीपी के माध्यम से अपना धन लिक्विड फंड में ट्रांसफर करना चालू करेंगे।

इसके अलावा, जब आप अपने कुछ महत्वपूर्ण वित्तीय लक्ष्यों की योजना बनाते हैं जैसे कि घर खरीदना, बच्चों की शिक्षा, उनकी शादी,  आपकी सेवानिवृत्ति, आदि; एसटीपी बहुत उपयोगी हो सकता है क्योंकि यह आपको इक्विटी से डेट में धीरे-धीरे शिफ्ट होने में मदद करेगा, जब आप अपने वित्तीय लक्ष्यों के करीब हैं।

एसटीपी के तहत, आपके द्वारा पहले निवेश की गई एकमुश्त राशि को नियमित अंतराल पर एक ही फंड हाउस की दूसरी म्यूचुअल स्कीम (आपकी इच्छा के अनुसार) में व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरित किया जाता है। आमतौर पर फंड हाउस ऐसे 6 ट्रांसफर की अनुमति देते हैं। साथ ही, ज्यादातर फंड हाउस आमतौर पर डेट म्यूचुअल फंड स्कीम से इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम में एसटीपी की अनुमति देते हैं, और उनमें से कुछ ही इसे इसके विपरीत अनुमति भी देते हैं। इसी तरह, अधिकांश फंड हाउस मासिक या त्रैमासिक विकल्प की अनुमति देते हैं, जबकि उनमें से कुछ ही साप्ताहिक या त्रैमासिक विकल्प की अनुमति भी देते हैं। इसके अलावा, एसटीपी के माध्यम से निवेश की जाने वाली न्यूनतम राशि भी अलग-अलग फंड हाउस के हिसाब से अलग-अलग होती हैं।

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) क्यों चुने?

Why to choose STP – हम सभी जानते हैं कि म्यूचुअल फंड इक्विटी बाजारों में निवेश करने का सबसे कारगर और अच्छा तरीका है। आज के बाजार परिदृश्य में, जबकि कोई व्यक्ति इक्विटी और ऋण बाजार दोनों का लाभ उठाने का लक्ष्य रखता है, इसमें एक अंतर्निहित रिस्क/जोखिम शामिल होता है। इस प्रकार, इन संबंधित asset/परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करते समय,  सतर्क दृष्टिकोण अपनाना और स्मार्ट और विवेकपूर्ण तरीके से आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।

एसटीपी सुविधा उन निवेशकों के लिए सबसे उपयुक्त है जो वेल्थ क्रिएशन (धन सृजन) के उद्देश्य से इक्विटी फंड में कुछ निवेश के साथ स्थिर रिटर्न चाहते हैं। जैसा कि हम सब जानते है कि डेट फंड कैपिटल प्रोटेक्शन (पूंजी संरक्षण) के लिए आदर्श होते हैं और इक्विटी फंड capital growth की तलाश करने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त होते हैं। इसलिए, विभिन्न प्रकार के फंडों का मिश्रण हमेशा दोनों asset class (परिसंपत्ति वर्गों) के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है।

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) कैसे शुरू करें?

How to Start a Systematic Transfer Plan – एक विशिष्ट अवधि में अपने इन्वेस्टमेंट की एवरेजिंग/औसत करने के लिए म्यूचुअल फंड  में STP एक बहुत ही उपयोगी तरीका है। आपको एसटीपी या एकमुश्त करना चाहिए यह तीन कारकों पर निर्भर करता है – निवेशक का इक्विटी में वर्तमान allocation या आवंटन, निवेशक का रिस्क प्रोफाइल और अंत में, मार्किट व्यू या बाजार का दृष्टिकोण। उदाहरण के लिए, एसटीपी का उपयोग करके इक्विटी फंड में 1 लाख रुपये का निवेश करने के लिए, आप पहले या तो अल्ट्रा शॉर्ट-टर्म फंड या लिक्विड फंड का चयन करके उसमे निवेश करे और फिर एसटीपी के माध्यम से उसे इक्विटी में ट्रान्सफर करे हैं।

उसके बाद, एक निश्चित राशि तय करें जिसे आप दैनिक, साप्ताहिक, मासिक या त्रैमासिक रूप से स्थानांतरित करना चाहते हैं। यदि आप हर तीन महीने में क्वाटरली 20,000 रुपये ट्रान्सफर करना चुनते हैं, तो निवेश को पूरा करने में पांच तिमाहियों (15 महीने) का समय लगेगा।

पहले ज्यादातर फंड हाउस आमतौर पर डेट म्यूचुअल फंड स्कीम से इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम में एसटीपी की अनुमति देते थे किन्तु अब AMC अपने इक्विटी फंड से दुसरे फंड में धन ट्रान्सफर करने की अनुमति भी देते हैं।

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के प्रकार

Types of STP/Types of Mutual Fund STP – मोटे तौर पर 3 प्रकार के एसटीपी विकल्प हैं:

1. फिक्स्ड एसटीपी/Fixed STP – इसके तहत एसटीपी के जरिए ट्रांसफर की जाने वाली राशि (निवेश के समय पूर्व निर्धारित) तय होती है। निर्दिष्ट राशि को वांछित (यानी लक्ष्य) म्यूचुअल फंड योजना में स्थानांतरित किया जाता है।

2. पूंजी मूल्यह्रास या लाभ उत्पन्न/Capital Appreciation or Profit generated STP – इस एसटीपी विकल्प के तहत, पूंजी वृद्धि या निवेशित राशि पर अर्जित लाभ (मूलधन को बरकरार रखते हुए) को लक्ष्य योजना में स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसलिए, यदि कोई नियमित लाभ बुक करना चाहता है और उसी फंड हाउस से डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करना चाहता है तो यह विकल्प अच्छा काम करता है।

3. फ्लेक्सी या वेरिएबल एसटीपी/Flexi STP/Variable STP – फ्लेक्सी एसटीपी के तहत आपके पास परिवर्तनीय राशि ट्रांसफर करने का विकल्प होता है। इस एसटीपी विकल्प के तहत न्यूनतम राशि तो तय है, लेकिन परिवर्तनीय राशि मार्किट के हिसाब से तय की जाती है। अगर टारगेट फंड की एनएवी गिरती है, तो गिरती कीमतों का फायदा उठाने के लिए निवेश बढ़ाया जा सकता है और इसी तरह अगर बाजार में तेजी आती है, तो बढ़ती कीमतों का फायदा उठाने के लिए ट्रांसफर की न्यूनतम राशि का निवेश किया जाता है। स्थानांतरण की सुविधा दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और त्रैमासिक अंतराल पर उपलब्ध है।

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के माध्यम से निवेश करते समय ध्रयान रखने योग्य बातें

Things to Remember While Investing via STP – निम्न बातों का हमेशा ध्यान रखें –

  • एसटीपी का विकल्प तभी चुने जब आपके पास निवेश करने के लिए एकमुश्त राशि हो जिसकी आपको निकट भविष्य में आवश्यकता न हो।
  • जैसे की पता है कि न्यूनतम निवेश फंड हाउस तय करता है, लेकिन आपको सेबी के मानदंडों के अनुसार कम से कम छह एसटीपी ट्रान्सफर प्लान करने की जरूरत है।
  • रिस्क/जोखिम कम करने वाली बहुत सी रणनीतियों में से एसटीपी सबसे विश्वसनीय रणनीति है जिसे निवेशक अपना सकते हैं। हालाँकि, एसटीपी के माध्यम से भी जोखिमों को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर सकते है। अगर बाजार सुधार के दौर से गुजर रहा है तो यह आपको मिलने वाले रिटर्न को प्रभावित कर सकता हैं।
  • एसटीपीमें निवेश के लिए अनुशासन की आवश्यकता होती है। मान लीजिए, यदि अगर आप बाजार में उतार-चढ़ाव या दरों में बदलाव के कारण किसी स्कीम से बाहर हो जाते है, तो आपका एसटीपी चुनने के पीछे का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
  • आपके द्वारा निवेश धन पर हमेशा नजर रखें। उदाहरण के लिए, जब बाजार अपने पीक/चरम पर हो तो, तो अपने पैसो को ट्रान्सफर करना तर्कहीन होगा। संक्षेप में, एसटीपी आपके रिटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किए बिना जोखिमों का प्रबंधन करने के लिए एक उपयोगी रणनीति है।

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के लाभ

Benefits of a Systematic Transfer Plan – सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के प्रमुख लाभ इस प्रकार से है –

1. उच्च रिटर्न/Scope for Higher Returns – जब आप एसटीपी का विकल्प चुनते हैं, तो आप इसके माध्यम से उच्च रिटर्न उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि एसटीपी शुरू में आपके पैसो को एक लिक्विड फंड की तरह डेट फंड में एकमुश्त निवेश करता है। और जैसा की हम जानते है लिक्विड फंड अपने सुरक्षित रिटर्न देने के लिए जाने जाते है। जहाँ  आप  सेविंग्स अकाउंट में 4% रिटर्न मिलता है वही लिक्विड फंड 7% -9% की सीमा में रिटर्न देने के लिए जाने जाते हैं।

2. स्थिर रिटर्न अर्जित करना/Earning Steady Returns – एसटीपी के जरिए किया गया रिटर्न काफी भरोसेमंद होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आप शुरू में डेट फंड में निवेश करते है और फिर आप धीरे धीरे एसटीपी के माध्यम से थोडा थोडा amount इक्विटी में ट्रान्सफर करते जाते हो, लेकिन जब तक आप पूरी राशि ट्रांसफर नहीं करते हैं, तब तक सोर्स फंड (डेट फंड) में रखा आपका बचा हुआ पैसा आपको ब्याज कमा के देते रहता है।

3. जोखिम प्रबंधन/Risk Management – एक एसटीपी का उपयोग रिस्की (इक्विटी) स्कीम से कम रिस्की (डेट) स्कीम में जाने के लिए भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए, आपने रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इक्विटी फंड में 30 साल के लिए SIP शुरू किया है। जैसे ही आप अपनी रिटायरमेंट के करीब पहुंचते हैं,  और आपको लगता है कि रिस्क हो सकता तो आप अपने पैसो के नुकसान को रोकने के लिए एक एसटीपी शुरू कर सकते हैं। यहां आप फंड हाउस को इक्विटी फंड से एक निश्चित राशि को डेट फंड में ट्रांसफर करने का निर्देश देंगे हैं। इस तरह, जब आप रिटायर होंगे, तब तक आप अपने पैसो को सुरक्षित ठिकाने में ट्रान्सफर कर चुके होंगे।

4. रुपया लागत औसत/Rupee Cost Averaging – सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान की मदद से आप अपने निवेश को एवरेज कर सकते है, जिसमे आप जब nav अपने उच्च स्तर पर है तो आप कम यूनिट खरीदेंगे और वही ज्यादा यूनिट लेंगे जब NAV कम स्तर पर हो। जैसे-जैसे आपका पैसा एक फंड से दूसरे फंड में ट्रांसफर होता जाएगा, फंड मैनेजर व्यवस्थित रूप से अतिरिक्त यूनिट्स की खरीदारी करता रहेगा। इसलिए, आपको rupee cost averaging (रुपये की औसत लागत) का लाभ मिलेगा, यानी निवेश की per unit cost (प्रति इकाई लागत) धीरे-धीरे कम होती जाएगी।

5. पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करना/Portfolio Rebalancing – आपके पोर्टफोलियो में डेट और इक्विटी के बीच संतुलन होना चाहिए। और एसटीपी आपके इसी काम को  डेट से इक्विटी फंड में या इसके विपरीत इक्विटी से डेट फंड में पैसे ट्रान्सफर करके आपके पोर्टफोलियो को Re-balance करता है।

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए किसे निवेश करना चाहिए?

Who Should Invest via Systematic Transfer Plans? – एसटीपी उन लोगों के लिए एक बहुत अच्छा/उत्कृष्ट विकल्प है जो एकमुश्त निवेश करना तो चाहते हैं लेकिन एक बार में ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि वे जोखिम लेने से डरते हैं और बाजार की अस्थिरता में फंसना नहीं चाहते हैं। ऐसे निवेशक लिक्विड या डेट फंड में निवेश करने का विकल्प चुनते हैं।

समय की साथ जब यह पैसा किसी इक्विटी फंड में ट्रांसफर होता जाता है, तो आपको डेट फंड से निश्चित रिटर्न के साथ-साथ इक्विटी स्कीम से संभावित रिटर्न मिलना शुरू हो जाता है।

सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) टैक्सेशन

Systematic transfer plan taxation – जैसा की हम जानते है की STP में फंड एक स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रान्सफर होते है, और हर ट्रांसफर को रिडेम्पशन माना जाता है। तो अगर इस  ट्रांसफर रिडेम्पशन में अगर कोई कैपिटल गेन है, तो वे फंड के प्रकार के आधार पर टैक्टैसेबल या  उन पर टैक्स लगेगा।

डेट फंड के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20 प्रतिशत टैक्स लगता है, जबकि शॉर्ट टर्म गेन पर निवेशकों पर लागू स्लैब रेट पर टैक्स लगता है।

दूसरी ओर, इक्विटी फंड 1 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कर से मुक्त हैं और यदि लाभ 1 लाख से अधिक है तो LTCG 10 प्रतिशत से अधिक शुल्क लिया जाता है। इक्विटी फंड पर शोर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)पर 15 फीसदी टैक्स लगता है। इसलिए, एसटीपी के बारे में निर्णय लेते समय इन बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

आज हमने देखा कि STP in Mutual Fund, आगे हम म्यूच्यूअल फंड के और भी रोचक टॉपिक आपके लिए लाते रहेंगे । आपको ये आर्टिकल कैसा लगा हमे बताएं। हमे आपके सुझाव एवं कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा। बने रहिये अपनीबचत पर।

 

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