Important Takeaways Loans

What is home loan, types and benefits in Hindi

होम लोन क्या है

What is home loan, types and benefits

हर एक व्यक्ति अपने घर का सपना देखता है। घर इंसान की बुनियादी जरूरत है। यह आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू भी है। यह सपना पूरा करने के लिए पहले के जमाने में लोग धन जमा करते थे, कई तरह की स्कीम में डिपॉजिट करते थे। जब पर्याप्त धन जमा हो जाता था तो घर खरीदते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।

अब घर खरीदने में सक्षम होने के लिए रुपया जोड़कर वर्षों तक इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। आज बैंकों द्वारा आसानी से दिए जा रहे होम लोन के कारण हर कोई घर लेने का सपना पूरा कर सकता है। लोन लेने के बाद लोन राशि का भुगतान समान मासिक किस्तों (ईएमआई) में किया जाता है। प्रति ईएमआई देय राशि आमतौर पर ऋण अवधि , ब्याज दर, ऋण की राशि आदि पर निर्भर करती है। कम ब्याज दर पर सस्ते होम लोन देने वाली हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां और बैंक काफी संख्या में मौजूद हैं। पिछले एक दशक में होम लोन की मांग कई गुना बढ़ गई है। जब आप बैंक से लोन लेकर घर, फ्लैट या प्लाट खरीदते हैं तो लोन की राशि खत्म होने तक आपकी प्रॉपर्टी बैंक के अधीन रहती है।

होम लोन के प्रकार

  1. गृह निर्माण ऋण: यह लोन बैंकों या वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है जो अपने घर का निर्माण खुद के मालिकाना हक के भूखंड पर करना चाहता है।
  2. घर खरीदने के लिए ऋण: घर खरीदने के लिए बैंकों या वित्तीय कंपनियों से उधार ली गई राशि को ‘होम परचेस लोन’ कहा जाता है। इस प्रकार के लोन में ब्याज की दरें फ्लोटिंग, हाइब्रिड या फिक्स हो सकती हैं। लगभग सभी बैंकों से आपके घर के वर्तमान बाजार मूल्य की करीब 90 फीसदी राशि लोन के रूप में मिल सकती है।
  3. गृह विस्तार/सुधार ऋण: आपके पास पहले से एक घर है, लेकिन आप उसे बढ़ाना चाहते हैं अथवा अतिरिक्त निर्माण करना चाहते हैं और आपके पास धन नहीं है तो इसके लिए भी आपको बैंक से लोन मिलेगा। इसके अलावा घर की पेंटिंग, बोरवेल खुदाई, बिजली के तारों और अन्य प्रकार की मरम्मत के लिए भी बैंक रुपया उधार देते हैं।
  4. एनआरआई होम लोन: यह ऋण बैंकों और वित्तीय कंपनियों द्वारा उन एनआरआई व्यक्तियों को दिया जाता है जो भारत में घर लेना चाहते हैं। हालांकि, प्रक्रिया थोड़ी जटिल रहती है।
  5. टॉप-अप लोन: व्यक्तिगत खर्च पूरे करने या नए घर के लिए सामान/चीजें खरीदने के लिए होम लोन पर ‘टॉप-अप लोन’ ले सकते हैं। टॉप-अप लोन पाने के लिए होम लोन का होना अनिवार्य है।
  6. होम लोन बैलेंस ट्रांसफर: जब कोई अपना होम लोन को एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर करना चाहता है तो इस विकल्प का लाभ उठा सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे- कम ब्याज दर, बेहतर सुविधाएं आदि।
  7. आवासीय भूखंड खरीद: यह ऋण उन लोगों के लिए है जो आवासीय भूखंड खरीदना चाहते हैं। साथ ही निकट भविष्य में इस पर घर बनाना चाहते हैं। इस लोन में प्लॉट के बाजार मूल्य की राशि का करीब 70 फीसदी लोन के रूप में मिल सकता है।

हम पढ़ रहे है – What is home loan, types and benefits in Hindi

होम लोन – टैक्स छूट

 पहली बार घर खरीदने वालों को यह लाभ मिलेगा

आप धारा 80-C और धारा 24 के तहत अपने होम लोन की मूल और ब्याज राशि में कटौती का दावा कर सकते हैं, तो आप पहली बार के होमबॉयर के रूप में अतिरिक्त कर कटौती का भी दावा कर सकते हैं। इसी तरह धारा 80-EE के तहत आप ब्याज में 50 हजार रुपए प्रति वर्ष छूट का दावा भी कर सकते हैं। इसके लिए यह जरूरी है कि आपके घर की कीमत कम से कम 50 लाख रुपए हो और लोन राशि 3 लाख रुपए से कम बची हो।

होम लोन के ब्याज भुगतान पर लाभ

इसके अलावा आप आयकर अधिनियम की धारा 24 के तहत अपने गृह ऋण पर दिए गए ब्याज के संबंध में क्लेम का दावा कर सकते हैं। यदि आप संपत्ति के मालिक हैं और 5 वर्ष की तय सीमा में निर्माण पूरा कर लेते हैं तो ब्याज में 2 लाख रुपए तक की छूट का दावा कर सकते हैं। इसी तरह यदि तय समय में निर्माण पूरा नहीं हुआ, तो भी आप 30 हजार रुपए की छूट पा सकते हैं।

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इंटरेस्ट रेट टाइप – फिक्स/फ्लोटिंग

होम लोन स्वीकृत करने से पहले बैंक द्वारा आपको ब्याज के दो विकल्प बताए जाते हैं। एक फ्लोटिंग, दूसरा फिक्स इंट्रेस्ट। इनमें से कोई एक प्लान लेने से पहले इनके बीच का अंतर समझ लेना चाहिए। फिक्स्ड प्लान में ब्याज दरें पहले से तय होती हैं। फ्लोटिंग में इंट्रेस्ट रेट बदलता रहता है। एक बात और, आप फिक्स्ड रेट पर लोन लेते हैं तो ध्यान रखें कि बैंक पूरी लोन अवधि के लिए फिक्स्ड रेट नहीं रखते। बाद में बैंक इसे फ्लोटिंग में बदल देते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले पूछ लें कि कितने वर्ष तक फिक्स्ड रहेगा। कई बार बैंक फिक्स्ड रेट पर लोन देते हैं, लेकिन एक क्लॉज लगाकर लिख देते हैं कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में निर्धारित सीमा से ज्यादा बढ़ोतरी होती है तो बची लोन राशि पर फ्लोटिंग रेट से ब्याज लिया जाएगा।

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कितना लोन मिल सकता है?

जो लोग पहली बार होम लोन लेने की सोच रहे होते हैं, उनके मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि उन्हें बैंक कितना लोन मंजूर कर सकता है? इसका सीधा जवाब यह है कि महीने में आपको जितना वेतन मिलता है, उसे 60 से गुणा कर दें, उतनी राशि का लोन मिलना आपको संभव हो सकता है। इसमें शर्तें लागू रहती हैं जैसे कि आपका एजुकेशन लोन, व्हीकल लोन या होम लोन पहले से न चल रहा हो। आपकी क्रेडिट रिपोर्ट खराब है तो इसका बुरा असर पड़ता है। सरकारी कर्मचारी को बैंक बहुत आसानी से लोन दे देते हैं। वही, प्राइवेट कर्मियों, व्यवसाय वालों के लिए लोन की पात्रता शर्तें अलग-अलग होती हैं। इन्हें काफी सारे सबूत दस्तावेजों के रूप में देना पड़ते|

कितना लोन लेना चाहिए?

आसानी से चुका सकें, उतने वर्ष के लिए लें लोन – वर्तमान में होम लोन लेना हर आदमी की जरूरत बन गया है। कुछ लोगों के लि ए यह लोन वरदान साबित हो रहा है, जिनका पहले से कोई घर नहीं है। जो लोग अपनी कम आयु में पहला घर ले लेते हैं, वे 10-15 वर्ष बाद होम लोन चुकता करने के बाद दूसरा घर भी ले लेते हैं। कुछ लोग लेने पर विचार करते हैं। जब पहला लोन बगैर कोई किस्त पेंडिंग रखे समय पर चुका देते हैं तो बैंक में आपकी क्रेडिट बन जाती है। इसका फायदा आपको दूसरी बार लोन लेते समय होता है। तब बैंक आपको आसानी से लोन मंजूर कर देता है। हो सकता है जब आप दूसरी बार होम लोन लें, तब बैंक के नि यम व शर्तें बदल गई हों, उसका ध्यान रखें। एक बात और, जल्द चुकाने के फेर में होम लोन कभी भी इतने कम वर्षों के लिए न लें कि आपकी ईएमआई बहुत बढ़ जाए। इसका नुकसान यह होगा कि आपकी महीने की इनकम में से एक बड़ी राशि किस्त में चली जाएगी। इसका प्रभाव बच्चों की पढ़ाई, घर खर्च , बीमारी-दवाई या कोई इमरजेंसी के वक्त पड़ सकता है। इन जरूरतों को पूरा करने केप्रयास में आप डिफाल्टर बन सकते हैं।

संपत्ति में महिला भागीदार है तो मिलती है छूट

संपत्ति खरीदते समय आपको अपने नाम रजिस्ट्री करानी पड़ती है। यह रजिस्ट्री स्टाम्प पर दर्ज होती है और इसके लिए आपको हजारों या लाखों रुपए (संपत्ति की कीमत का कुछ प्रतिशत तय है) के स्टाम्प खरीदना पड़ते हैं। कई राज्यों में तो यह संपत्ति की कीमत का 12 प्रति शत तक है। यह एक अनि वार्य शुल्क है जो स्टाम्प के रूप में राज्य सरकार द्वारा लगाया जाता है। यह शुल्क सरकार आपके नाम पर आपकी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन सत्यापित करने और आपके प्रॉपर्टी के स्वामित्व के दस्तावेजों को मान्यता प्रदान करने के लिए लेती है। यदि आपने रजिस्ट्री में पत्नी, मां या परिवार की किसी और महिला को भागीदार बनाया तो आपको एक फीसदी छूट मिलती है। वहीं, आपने प्रॉपर्टी सीधे पत्नी के नाम खरीदी तो दो फीसदी छूट मिलेगी।

एक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर हो सकता है लोन

बैंक से लिए होम लोन में आपको एक सुविधा यह भी मिलती है कि आप जब चाहें, बैंक बदलकर अपना लोन दूसरे बैंक में ट्रांसफर करवा सकते हैं। यह तभी फायदेमंद है, जब दूसरे बैंक की ब्याज दर और आपके पहले वाले बैंक की ब्याज दर में अच्छा खासा अंतर हो। आप पुराने बैंक से भी कह सकते हैं कि आपको कम ब्याज दर पर अन्य बैंक से लोन मिल रहा है, ऐसे में आपका बैंक ब्याज कम कर दे तो ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उदाहरण के लिए आपने किसी बैंक से 15 वर्ष के लिए लोन लिया है। इस बीच  आईबीआई रेपो रेट घटाता है और बैंकों को ब्याज दर कम करने को कहता है। बावजूद इसके आपका बैंक इसे लागू नहीं करता है तो आप कम ब्याज लेने वाले बैंक में लोन ट्रांसफर कराना फायदेमंद हो सकता है।

Additional Reading – Home Loan Transfer

हमने होम लोन (What is home loan, types and benefits) को समझा आगे की पोस्ट में हम होम लोन पर टैक्स पर चर्चा करेंगे |

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