Important Takeaways

Personal Finance Kya Hai पर्सनल फाइनेंस क्या है?

आज हम इस पोस्ट की मदद से समझेंगे की personal financial management या Personal Finance Kya Hai| और ये हमे कैसे हमारे financial goals तक पहुँचने में मदद करती है, जिससे भविष्य में हम financial independent हो सके| ये पोस्ट financial planning for individuals के लिए बहुत ही उपयोगी है|

पर्सनल फाइनेंस

पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग का अर्थ है कि अपने धन को मैनेज करना | अपने धन का बेहतर ढंग से बचत और निवेश करना| इसमें बजट बनाना, बैंकिंग, इन्शुरन्स, निवेश, रिटायरमेंट प्लानिंग या टैक्स प्लानिंग आदि आते है|

इस पोस्ट में हम पर्सनल फाइनेंस के बारे में विस्तार से जानेंगे और साथ में ये कि –

  • पर्सनल फाइनेंस क्या होता है
  • पर्सनल फाइनेंस से क्या फायदे है या पर्सनल फाइनेंस से लाभ
  • पर्सनल फाइनेंस कैसे करते है या पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग स्टेप्स

पर्सनल फाइनेंस क्या है?

पर्सनल फाइनेंस में आपके जो भी फाइनेंसियल गोल हो उसको पूरा करने कि प्लानिंग होती है| गोल चाहे वो शोर्ट टर्म (Short- term) हो, एक या दो साल में कुछ खरीदना हो या लॉन्ग टर्म  (long- term) जैसे- रिटायरमेंट प्लानिंग या बच्चो की हायर एजुकेशन एवं शादी|

पर्सनल फाइनेंस आपकी आय (income), व्यय (expense), जीवन यापन का खर्च, आपके गोल्स और इच्छाओ को आधार बना के एक ऐसा प्लान बनाना को जो आपके गोल्स या सपने को पूरा करने में मदद करे|

पर्सनल फाइनेंस से क्या फायदे है या पर्सनल फाइनेंस से लाभ

  1. आपकी आय (income) का लेखा-जोखा बताता है र्आथात आप कहाँ कितना खर्च कर रहे है, उस का विवरण देता है| जिस से व्यर्थ के खर्च बचते है|
  2. आपके बजट को अधिक व्यवहारिक बनाता है, या सरल शब्दों में आप ऐसा बजट बनाते है, जिससे धन संचय (savings and wealth grow) होता है|
  3. आपके सपने को पूरा करने की दिशा देता है|
  4. आप के भविष्य में होने वाले खर्चो और आय (income) के बारे में बताता है, जिस से आपको पहले से पता चल जाता है कि गोल्स को पूरा करने के लिए आप को कितना पैसा निवेश से वापस मिलना चाहिए या कितना निवेश और करना है|
  5. आपके भविष्य को सुरक्षित रखता है और आकस्मिक आने होने वाले खर्चो को पूरा करने में भी मदद करता है|
  6. आय (income) के अन्दर खर्च (expense) करने का अनुशासन पैदा होता है, जो कि धन संचय करवाता है|
  7. सही निवेश उत्पादों के चयन में मदद करता है| अधिकांश लोग पर्सनल फाइनेंसियल में निवेश पे ही ध्यान देते है, और टैक्स बचत के लिए बिना सोचे समझे कोई भी फाइनेंसियल प्रोडक्ट ले ले लेते है जबकि ऐसे बहुत से स्कीम है जो एक बेहतर निवेश योजना तो है ही साथ में टैक्स बचत का लाभ भी देती है | जिससे आप को टैक्स बचत के लिए अलग से कुछ न लेना पड़ता|
  8. पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग बजटिंग को सुद्रढ़ करती है जिससे हर माह कुछ धन जुड़ना शुरु हो जाता है | इस धन को आप अपने बेहतर भविष्य के लिए इस्तेमाल कर सकते है जैसे – आप इस धन को अपने लोन को जल्दी चुकाने के लिए EMI राशि में जुडवा सकते है, या इसे कही और निवेश भी कर सकते है|

हम पढ़ रहे है: Personal Finance Kya Hai & their benefits

पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग स्टेप्स

सबको शामिल करे – अपने घर में यदि एक से अधिक पैसे कमाने वाले सदस्य (earning members) है, तो उन सभी सदस्यों को फाइनेंसियल प्लानिंग में शामिल करे| सब को शामिल करने से आप कि जमा पूंची भी ज्यादा होगी और लक्ष्य भी जल्दी हासिल होगा |

गोल्स बनाना – घर के सदस्यों से फैमिली के भविष्य के लिए गोल्स पूछे और उचित क्रम में व्यवस्थित करे| हर गोल्स के आगे समय सीमा लिखे और हो सके तो कितना धन लगेगा (एक अनुमानित राशि) भी लिखे| इससे आप को पता चलेगा कि कौन सा लघु कालीन गोल (Short- term goal) और दीर्घ कालीन गोल (long- term goal) है और हर एक के लिए कितना धन चाहिए |

अपनी फाइनेंसियल दशा का विश्लेषण करे – सब की आय (income), ऋण एवं उपलब्ध संसाधनों आदि के बारे में लिख ले| इससे आप को अपनी वर्तमान फाइनेंसियल दशा का पता चलेगा| ये आप को बतायेगा कि रेगुलर आय (income) से आप कितना धन जोड़ पायेंगे और कितना धन कम पड़ेगा |

वैकल्पिक समाधान तलाशे – विभिन्न निवेश उपायों जैसे – शेयर,  म्यूच्यूअल  फंड, पी पी एफ, बांड, एफ डी , आर डी आदि के बारे में पता करे| सब की ब्याज की दर (rate of interest), जोखिम, निवेश समयावधि और लॉक-इन समय (lock-in period) पता कर ले| अपने गोल्स को प्राप्त करने के लिए आप को विभिन्न उपायों को मिश्रण यानि कि मिक्स एंड मैच (combinations) करके भी मदद ले  सकते है बस ध्यान ये देना है कि निवेश समयावधि आप के गोल्स की समयावधि से मेल खाना चाहिए |

प्लान का अनुसरण करे – अब तक आप जान चुके है कि आप को कहाँ-कहाँ निवेश करना है| उस के लिए जरुरी पेपर्स, बैंक एकाउंट आदि इकठ्ठा कर ले| इस के लिए आप किसी एजेंट या फाइनेंसियल प्लानिंग कम्पनी से भी सहयता ले सकते है परन्तु सब से जरुरी है कि निवेश जल्द से जल्द प्रारंभ करे |

प्लान का पुनरीक्षण करना – प्लान का पुनरीक्षण करना प्लान बनाने जितना ही आवश्यक है | इस लिए पुनरीक्षण हर ६ माह में या कोई भी उतार-चढाव होने पे जैसे – बच्चे के जन्म , बोनस मिलने पे, जॉब बदलने में या किसी नुकसान पे जरुर से करे|इससे आप को अपने निवेश से होने वाले रिटर्न के बारे में पता चलता रहता है, जिससे आप समय रहते अपना निवेश को कम या ज्यादा कर सकते है |

याद रखिये पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण चरण है इसको नजरअंदाज न करे| इसलिए फाइनेंसियल प्लानिंग को प्लान न कह के प्लानिंग कहते है|

अंत में कुछ जरुरी टिप्स

  1. निवेश करना आज से शुरु करे| एक-एक दिन के बयाज़ का महत्व है इसलिए आज से शुरु करे न कि 30-40 साल के होने का इंतजार करे|
  2. अगर आप को लगे तो फाइनेंसियल प्लानिंग के लिए कम्पनी या एजेंट कि मदद जरुर ले|
  3. व्यावहारिक गोल्स बनाये जो आप पूरा कर सके| उसी तरह से निवेश उपायों से रिटर्न कि भी एक सीमा है इसलिए अनुचित अपेक्षा न करे|
  4. प्लान का पुनरीक्षण जरुर करे और उस के अनुसार बदलाव करे|
  5. निवेश कैसा रिटर्न दे रहे है उसका भी पुनरीक्षण करे अगर जरुरी हो तो पैसे निकाल के दुसरे निवेश उपाय में पैसा लगाये |

इस पोस्ट में हमने पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग को समझा, अगली पोस्ट में हम पर्सनल फाइनेंसियल प्लानिंग को सफल बनाने के तरीके जिसे हम बजट बनाना भी बोलते है, उसे समझेंगे और साथ में ये भी समझेंगे की एक कुशल बजट कैसे बनाया जाता है, और इसके क्या लाभ है?

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