Tax on Mutual Fund 2021 in Hindi | म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने पर कितना टैक्स लगता है?

by Rahul Gupta
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Tax on Mutual Fund 2021 in Hindi

म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने पर कितना टैक्स लगता है?, Tax on Mutual Fund 2021 in Hindi

Mutual Fund Taxation/Tax on mutual fund 2021/How mutual funds are taxed – म्यूचुअल फंड पर टैक्सेशन/कराधान समझने के हिसाब से थोडा जटिल विषय है। आपके म्युचुअल फंड निवेश पर चुकाए गए कर बहुत हद तक इन कारकों पर निर्भर करते हैं जैसे कि आपने किस तरह के फंड में निवेश किया है, आपके निवेश की अवधि और आप किस आयकर स्लैब में आते हैं।

म्युचुअल फंड सबसे लोकप्रिय निवेश विकल्पों में से एक हैं क्योंकि वे आपके वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में आपकी मदद करते हैं। म्युचुअल फंड दुसरे निवेश विकल्पों से काफी टैक्स एफ़ीशियेंट (कर-कुशल) साधन हैं।

फिक्स्ड डिपाजिट/सावधि जमा में निवेश करने का एक बड़ा नुकसान यह है कि, यदि आप उच्चतम आयकर ब्रैकेट के अंतर्गत आते हैं, तो फिक्स्ड डिपाजिट से कमाया ब्याज आपकी कर योग्य आय में जोड़ा दिया जाता हैं और फिर उस पर टैक्स आपकी आयकर स्लैब दर के टैक्स के हिसाब से लगाया जाता है।  यही वह कारण है जिसमे म्यूच्यूअल फंड दुसरे निवेश विकल्पों से बेहतर माने जाते हैं। जब आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो आपको विशेषज्ञ धन प्रबंधन और कर-कुशल रिटर्न का लाभ मिलता है।

भारत में म्यूचुअल फंड के प्रकार (Types of Mutual Funds in India)

आपने डेट फंड, इक्विटी फंड, ईएलएसएस फंड, इंडेक्स फंड, लिक्विड फंड, इनकम फंड जैसे शब्दों का अक्सर म्यूच्यूअल फंड निवेश से समय सुना होगा। हालांकि, म्यूचुअल फंड को मोटे तौर पर इक्विटी फंड, डेट फंड और हाइब्रिड फंड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

इस लेख में, हम म्यूचुअल फंड कराधान पर चर्चा करना चाहते हैं और आपको यह समझने में मदद करना चाहते हैं कि आपके म्यूचुअल फंड रिटर्न पर कैसे कर लगाया जाता है।

आप म्यूचुअल फंड से रिटर्न कैसे कमाते हैं (How Do You Earn Returns in Mutual Funds)

म्यूचुअल फंड निवेशकों को दो रूपों में रिटर्न देते हैं;

  1. जब भी कोई कंपनी अच्छे मुनाफे कमाती है तो कंपनी इस मुनाफे को डिविडेंड या लाभांश के रूप में अपने निवेशको के साथ साझा करती है या कर सकती जब कंपनियों के पास अधिशेष नकदी बची होती है, तो वे लाभांश के रूप में इसे निवेशकों के साथ साझा करने का निर्णय ले सकती हैं।निवेशकों को उनके द्वारा धारित म्यूचुअल फंड इकाइयों की संख्या के अनुपात में लाभांश प्राप्त होता है।
  2. जब आप अपनी संपत्ति को लाभ पर बेचते हैं, तो अर्जित कुल लाभ को पूंजीगत लाभ कहा जाता है। जबकि पूंजी कुछ और नहीं बल्कि मूल निवेश है जो आपकी म्यूचुअल फंड इकाइयों को खरीदने के लिए किया गया था।

सरल शब्दों में, म्यूचुअल फंड इकाइयों जिसे हम NAV भी कहते है, की कीमतो में वृद्धि के कारण हमे जो लाभ मिलता है वो पूंजीगत लाभ कहलाता है। म्यूचुअल फंड के निवेशकों के हाथों में लाभांश और पूंजीगत लाभ दोनों कर योग्य हैं।

होल्डिंग अवधि (Holding periods)

जिस अवधि के लिए आप अपने म्यूचुअल फंड निवेश को होल्ड करके रखते हैं, उसे होल्डिंग पीरियड कहा जाता है। अल्पकालिक निवेश लंबी अवधि के निवेश से प्राप्त लाभ पर टैक्स की अलग अलग दर लगती है, जिसे हम आगे के आर्टिकल में देखेंगे।

म्युचुअल फंड द्वारा दिए गए लाभांश पर टैक्स (Tax on Dividend Income)

केंद्रीय बजट 2020 में किए गए संशोधनों के अनुसार, किसी भी म्यूचुअल फंड योजना द्वारा दिए जाने वाले लाभांश पर नार्मल तरीके से कर लगाया जाता है। यानी निवेशकों द्वारा प्राप्त लाभांश को उनकी कर योग्य आय में जोड़ा जाता है और उनके संबंधित आयकर स्लैब दरों पर टैक्स लगाया जाता है।

पहले, लाभांश निवेशकों के लिए कर-मुक्त थे क्योंकि पहले कंपनियां निवेशकों के साथ लाभांश को साझा करने से पहले ही डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लाभांश वितरण कर (डीडीटी) का भुगतान करती थी। उस समय के दौरान, निवेशकों के हाथ में सालाना 10 लाख रुपये तक के लाभांश (घरेलू कंपनियों से प्राप्त) कर-मुक्त थे। प्रति वित्तीय वर्ष 10 लाख रुपये से अधिक के किसी भी लाभांश पर 10% पर डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लगता था।

म्युचुअल फंड द्वारा दिए गए कैपिटल गेन पर टैक्स (Tax on Capital Gains)

म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ) पर टैक्स की दर  फण्ड के होल्डिंग अवधि और म्यूचुअल फंड के प्रकार पर निर्भर करती है। होल्डिंग अवधि वह अवधि है जिसके लिए किसी निवेशक के पास म्युचुअल फंड इकाइयां होती हैं। सरल शब्दों में, होल्डिंग अवधि म्यूचुअल फंड इकाइयों की खरीद और बिक्री की तारीख के बीच का समय है। म्यूचुअल फंड की इकाइयों को बेचने पर प्राप्त पूंजीगत लाभ को निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया है:

फंड का प्रकार
Fund Type
अल्पकालिक पूंजीगत लाभ
Short-term capital gains
लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ
Long-term capital gains
इक्विटी फंड/Equity funds 12 महीने से कम 12 महीने और उससे अधिक
डेट फंड/Debt funds 36 महीने से कम 36 महीने और उससे अधिक
हाइब्रिड इक्विटी ओरिएंटेड फंड/Hybrid equity-oriented funds 12 महीने से कम 12 महीने और उससे अधिक
हाइब्रिड डेट ओरिएंटेड फंड/Hybrid debt-oriented funds 36 महीने से कम 36 महीने और उससे अधिक

म्यूचुअल फंड द्वारा दिए जाने वाले शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर अलग-अलग दरों पर टैक्स लगता है।

इक्विटी फंड के पूंजीगत लाभ का कराधान (Tax on Equity Mutual Funds)

Tax on Capital Gains of Equity Funds – इक्विटी फंड वे म्यूचुअल फंड होते हैं जिनके पोर्टफोलियो का इक्विटी एक्सपोजर 65% से अधिक होता है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, आपको एक वर्ष की होल्डिंग अवधि के भीतर अगर आपने अपने इक्विटी फंड की इकाइयों को रिडीम किया तो उस बिक्री या रिडेम्पशन पर शोर्ट टर्म कैपिटल गेन या अल्पकालिक पूंजीगत लाभ प्राप्त होगा। इन लाभों पर 15% की समान दर से कर लगाया जाता है, चाहे आपका टैक्स स्लैब कुछ भी हो।

आप एक वर्ष या उससे अधिक की होल्डिंग अवधि के बाद अपनी इक्विटी फंड इकाइयों को बेचने पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ अर्जित करते हैं। सालाना 1 लाख रुपये तक के ये पूंजीगत लाभ कर-मुक्त हैं। इस सीमा से अधिक का कोई भी दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ 10% की दर से LTCG के हिसाब से टैक्सेबल है , और इसमें इंडेक्सेशन का कोई लाभ प्राप्त नही होगा।

डेट फंड के पूंजीगत लाभ का कराधान (Tax on Debt Mutual Funds)

Tax on Capital Gains of Debt Funds – डेट फंड वे म्यूचुअल फंड होते हैं जिनके पोर्टफोलियो का डेट फंड का एक्सपोजर 65% से अधिक होता है। जैसा कि ऊपर दी गई तालिका में बताया गया है, आपको अपनी डेट फंड इकाइयों को तीन साल की होल्डिंग अवधि के भीतर रिडीम करने पर शोर्ट टर्म कैपिटल गेन या अल्पकालिक पूंजीगत लाभ मिलता है। इन लाभों को आपकी कर योग्य आय में जोड़ा जाता है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगाया जाता है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स तब मिलता है जब आप तीन साल की होल्डिंग अवधि के बाद डेट फंड की यूनिट बेचते हैं। इंडेक्सेशन के बाद इन लाभों पर 20% की समान दर से कर लगाया जाता है। साथ ही, इन पर लागू उपकर और कर पर अधिभार (surcharge) भी लगाया जाता है।

हाइब्रिड फंड के पूंजीगत लाभ का कराधान (Tax on Hybrid Mutual Funds)

Taxation of Capital Gains of Hybrid Fund – हाइब्रिड या बैलेंस्ड फंड से प्राप्त पूंजीगत लाभ पर टैक्स की दर आपके पोर्टफोलियो के इक्विटी एक्सपोजर पर निर्भर करता है। अगर इक्विटी एक्सपोजर 65% से अधिक है, तो फंड स्कीम पर इक्विटी फंड की तरह टैक्स लगता है, अगर ऐसा नहीं है तो डेट फंड्स के टैक्सेशन के नियम लागू होते हैं।

इसलिए, जिस हाइब्रिड स्कीम में आप निवेश कर रहे हैं, उसके इक्विटी एक्सपोजर को जानना आवश्यक है, यदि नहीं, तो आप अपनी फंड इकाइयों के रिडेम्पशन पर अपना बहुत सा धन टैक्स के रूप में गवां देंगे, जो आपके रिटर्न को बहुत कम कर देगा। इसीलिए निवेश करते समय हमे इन चीजो का बहुत अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

पूंजीगत लाभ का कराधान जब एसआईपी के माध्यम से निवेश किया जाता है (Tax on SIPs)

Taxation of Capital Gains When Invested Through SIPs – सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) म्यूचुअल फंड में निवेश का एक तरीका है। इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि निवेशक म्यूचुअल फंड स्कीम में समय-समय पर छोटी रकम निवेश कर सकें। निवेशकों को अपने निवेश की आवृत्ति चुनने की स्वतंत्रता की पेशकश की जाती है। यह साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक, द्वि-वार्षिक या वार्षिक हो सकता है।

आप प्रत्येक एसआईपी किस्त के माध्यम से एक निश्चित संख्या में म्यूचुअल फंड यूनिट खरीदते हैं। इन इकाइयों का रिडीम/मोचन first-in-first-out (जो पहले आया वो पहले जाएगा) के आधार पर प्रोसेस्ड या संसाधित किया जाता है।

मान लीजिए आप एक साल के लिए एसआईपी के जरिए किसी इक्विटी फंड में निवेश करते हैं और आप 13 महीने के बाद अपने पूरे निवेश को भुनाने का फैसला करते हैं।

इस मामले में, एसआईपी के माध्यम से पहले खरीदी गई इकाइयों को लंबी अवधि (एक वर्ष से अधिक) के लिए रखा जाता है और आपको इन इकाइयों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ का एहसास होता है। अगर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स 1 लाख रुपये से कम है तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा।

हालाँकि, आप दूसरे महीने से SIP के माध्यम से खरीदी गई इकाइयों पर अल्पकालिक पूंजीगत लाभ अर्जित कर सकते हैं। इन लाभों पर आपके आयकर स्लैब के बावजूद 15% की एक समान दर से कर लगाया जाता है। आपको उस पर लागू उपकर और अधिभार का भुगतान करना होगा।

प्रतिभूति लेनदेन कर – एसटीटी (Securities Transaction Tax STT)

लाभांश और पूंजीगत लाभ पर कर के अलावा, एक और कर है जिसे सिक्योरिटीज ट्रान्सेकशन टैक्स या प्रतिभूति लेनदेन कर (STT/एसटीटी) कहा जाता है। सरकार (वित्त मंत्रालय) द्वारा 0.001% का STT/एसटीटी लगाया जाता है जब आप किसी इक्विटी फंड या हाइब्रिड इक्विटी-उन्मुख फंड की म्यूचुअल फंड इकाइयों को खरीदने या बेचने का निर्णय लेते हैं। डेट फंड यूनिट्स की बिक्री पर कोई एसटीटी नहीं है।

निष्कर्ष (Conclusion)

आप अपनी म्युचुअल फंड इकाइयों को जितना अधिक समय तक निवेशित रखेंगे, वे उतनी ही अधिक टैक्स – एफिशियेंट या कर-कुशल बन जाएंगी। लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर कर, अल्पकालिक लाभ पर कर की तुलना में तुलनात्मक रूप से कम है।

आज हमने देखा कि Tax on Mutual Fund 2021 in Hindi, आगे हम म्यूच्यूअल फंड के और भी रोचक टॉपिक आपके लिए लाते रहेंगे। आपको ये आर्टिकल कैसा लगा हमे बताएं। हमे आपके सुझाव एवं कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा। बने रहिये apneebachat.com पर।

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