KYC Full Form in Hindi 2021 | KYC Meaning | KYC Document

by Rahul Gupta
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KYC Full Form in Hindi 2021

KYC Full Form in Hindi 2021, KYC Meaning, KYC Document

KYC Full Form in Hindi 2021, KYC Meaning, KYC Document – KYC का फुल फ़ॉर्म “Know your Customer” (अपने ग्राहक को जानिए) होता है। KYC प्रक्रिया वह है जिसके अंतर्गत आयडेंटिटी और अड्रेस्ट वेरिफ़िकेशन किया जाता है। यह प्रक्रिया मुख्यरूप से बैंकों, बीमा कम्पनियों और कुछ और संस्थाओं द्वारा अपने ग्राहकों के साथ लेनेदेन से पहले या उसके दौरान पूरी की जाती है।

रिज़र्व बैंक ओफ़ इंडिया (RBI) ने KYC को हर प्रकार के फ़ायनैन्शल इन्स्टिटूट्स के लिए अनिवार्य कर दिया है, जैसे बैंक, इन्शुरन्स  इन्स्टिटूट्स, और किसी भी डिजिटल पेमेंट कम्पनी जो कि फ़ायनैन्शल ट्रैन्सैक्शंज़ (Financial Transaction) में शामिल होती है। आइए आज हम इस अर्टिकल में यह समझे कि KYC क्या है और उसके लिए कौन-कौन से डॉक्युमेंट्स की ज़रूरत होती है।

Table of Contents

KYC फुल फ़ॉर्म (KYC Full Form)

KYC का फुल फ़ॉर्म है “नो योर कस्टमर (Know Your Customer)”।

KYC क्या है? (What is KYC)

अगर आप ये सोच रहे हैं कि KYC क्या है और यह इतना छोटा शब्द क्यों है तो हम आपको बता दे कि यह ‘Know Your Customer’ शब्दों के पहले अक्षर से बना है। KYC हर संस्थान (Institute) को उनके ग्राहकों के पहचान को प्रमाणित (Authenticate) करने में मदद करते है।

सरल शब्दों में कहा जाए तो, KYC वह प्रक्रिया है जिसके अतंर्गत ग्राहकों के पहचान को सहायक पहचान पत्रों के आधार पर इस्टैब्लिश किया जाता है। इन दस्तावेज़ो में फ़ोटो आईडी (उदाहरण के लिए वोटर आइडी, आधार कार्ड, पैन कार्ड), इनमें पर्सन वेरिफ़िकेशन और ऐड्रेस प्रूफ़ शामिल होते हैं।

जैसे कि हमने ऊपर बताया है KYC प्रिवेन्शन ओफ़ मनी लॉंडरिंग ऐक्ट, २००२, के तहत एक अनिवार्य अभ्यास है और इस प्रक्रिया को साधारणतः दो भागों में बाँटा गया है।

  • पहले भाग यूनिफ़ॉर्म केवाईसी (Uniform KYC) के नाम से जाना जाता है, इसमें सेंट्रल केवाईसी रेजिस्ट्री (Central KYC Registry) के द्वारा उल्लेखित एक व्यक्ति के आवश्यक केवाईसी विवरण शामिल होते है।
  • केवाईसी प्रक्रिया के दूसरे भाग को अडिशनल केवाईसी (Additional KYC) कहा जाता है। इसके तहत फ़ायनैन्शल इंटर्मीडीएरी (Financial Intermediary) द्वारा एक व्यक्ति से कोई भी अतिरिक्त आवश्यक केवाईसी जानकारी माँगी जा सकती है।

KYC के महत्व (Importance of KYC)

Why KYC is important – KYC के निम्नलिखित महत्त्व है –

  • बैंकों के द्वारा बनायी गयी केवाईसी प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए है कि उनके ग्राहक वास्तविक हैं और सारी आवश्यक कार्यवाही की मदद से इसी तथ्यों का मूल्यांकन किया जाता है कि ग्राहकों से लेन-देन का व्यापार करने में कोई जोखिम नहीं है।
  • KYC की प्रक्रिया के माध्यम से की गयी क्लाइयंट-ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया मनी-लॉन्ड्रिग, टेररिज़म-फ़ायनैन्सिंग और बहुत सारे अन्य गैरकनूनी भ्रष्टाचार युक्त योजनाओं को पहचानने और उनसे बचने में मदद करती है।
  • KYC की प्रकिया के लिए आईडी कार्ड वेरिफ़िकेशन, फ़ेस वेरिफ़िकेशन, डॉक्युमेंट वेरिफ़िकेशन और उपयोगिता बिल (Utility Bills) वेरिफ़िकेशन (ऐड्रेस के प्रमाण के लिए) अनिवार्य है।
  • बैंकों के द्वारा KYC रेग्युलेशंज़ और ऐंटी-मनी लॉन्ड्रिग रेग्युलेशंज़ का पालन करना चाहिए। क्योंकि यह प्रक्रियाएँ बैंकों को किसी भी तरह की धोखाधड़ी का शिकार होने से बचाती हैं।
  • यह भी एक तथ्य है कि KYC रेग्युलेशंज़ का पालन करने की ज़िम्मेदारी बैंक की होती है। और अगर इन नियमों का अनुपालन नहीं किया जाए और कोई लापरवाही हो तो उसके लिए कठिन दंड दिया का सकता है।

केवाईसी कब आवश्यक होती है? (When is KYC required)

अब जब आप KYC का मतलब और उसकी उपयोगिता को समझ गए हैं, तो अब आपके लिए यह जानना भी बहुत आवश्यक है कि KYC की ज़रूरत कब होती है। यह हम समझ चुके है कि केवाईसी क़ानूनी और प्रशासनिक रूप से अनिवार्य है, और यही कारण है कि केवाईसी या ई-कवाईसी की प्रक्रिया को पूरा करना ग्राहकों के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। यह ग्राहकों को फ़ाइनैन्स कम्पनीज़ द्वारा प्रस्तावित अनेकों प्रीमीयम उत्पादों का लाभ उठाने तथा लेन-देन का कार्य तेजी से पूरा करवाने में मदद करती है।

बैंकों के लिए केवाईसी (KYC for Banks)

केवाईसी प्रक्रिया तथा उसका अप्डेटेड होना बैंक की जोखिम से सम्बंधित अनुभव के आधार पर एक खाते से दूसरे खाते के लिए भिन्न होता है और समय-समय पर बदलता है। KYC की प्रक्रिया को पूरा करना बहुत सारे ट्रैन्सैक्शंज़ जैसे – बैंक खाता खोलने, फ़िक्स्ट डिपॉज़िट में निवेश करने, रेकरिंग डिपॉज़िट के समय, म्यूचूअल फंड खाता खोलने और ऑनलाइन लेनदेन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।

केवाईसी का पालन अनिवार्य कर दिया गया है, क्योंकि यह बैंकों को यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि उनके द्वारा प्राप्त किया गया आवेदन और उससे सम्बंधित सभी जानकारी वैध ग्राहक के हैं। ग्राहकों की पहचान के बारे में आश्वस्त होना बैंक के लिए बेहद मददगार होता है, क्योंकि इस प्रकार बैंक आसानी से धोखाधड़ी को भाँप लेता है और उसे रोक पाने में सक्षम होता है।

निवेश/जीवन बीमा के लिए केवाईसी (KYC for Investments/Life Insurance)

केवाईसी की जानकारी इसलिए भी अनिवार्य होती है क्योंकि यह काले धन से सम्बंधित घटनाओं पर अंकुश लगाने में भी मदद करती है। और यह भी सुनिश्चित करती है कि निवेश/जीवन बीमा पॉलिसी को ख़रीदने वाला व्यक्ति वास्तविक है तथा कोई धोखा करने की साज़िश नहीं है।

अब तक हम KYC के महत्व के बारे में जान चुके हैं। अतः यह भी स्पष्ट हो चुका है कि केवाईसी किसी भी प्रकार के फ़ायनैन्शल ट्रैंज़ैक्शन की सुरक्षा के लिए अतिआवश्यक है और जिसका सभी जीवन बीमा तथा म्यूचूअल फंड में निवेश करने वालों को कठोरता से पालन करना चाहिए। यहाँ ध्यान देने वाला तथ्य यह भी है कि केवाईसी की प्रकिया केवाईसी रेजिस्ट्रेशन एजेन्सी (KYC Registration Agency) के माध्यम से आईआरडीएआई  (Insurance Regulatory and Development Authority of India) और एसईबीआई (Securities and Exchange Board of India) के निर्देशानुसार (as par guidelines) पूरा होना चाहिए।

केवाईसी उन सभी के लिए भी अनिवार्य है जो डीमैट और स्टॉक ट्रेडिंग खाता, बैंक खाता या फ़िक्स्ट डिपॉज़िट खाता खोलना चाहते हैं, जीवन बीमा ख़रीदना चाहते हैं, डिजिटल मनी ट्रान्स्फ़र के लिए मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करना चाहता हो या फिर किसी औथोराइज्ड संस्थान के साथ कोई और फ़ायनैन्शल ट्रैंज़ैक्शन करने के इच्छुक हो।

अप्डेटेड KYC के बिना आप भारत में किसी भी प्रकार के फ़ायनैन्शल ट्रैंज़ैक्शन को ना शुरू कर सकते हैं और ना हीं उसका उपयोग कर सकते हैं।

केवाईसी से सम्बंधित दस्तावेज में क्याक्या शामिल होता है? (What are included in KYC documents)

भारत सरकार द्वारा बनाए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार ६ दस्तावेज “ऑफिशिअली वैलिड डॉक्युमेंट्स (OVDs)” के रूप में मान्य हैं और उन्हें पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। यह भी सम्भावना है की अगर आपने किसी संस्थान में एक बार सारे केवाईसी दस्तावेज जमा कर दिए हैं, उसके बाद भी KYC रेकार्ड को अप्डेट करने के लिए समय-समय पर आपसे दस्तावेज माँगे जा सकते हैं। निम्नलिखित दस्तावेज की सूचि KYC प्रक्रिया के लिए आवश्यक हैं:

प्रूफ़ ऑफ आयडेंटिटी (Proof of Identity) के लिए ज़रूरी डॉक्युमेंट निम्न हैं:

  • यूनीक आयडेंटिफ़िकेशन नम्बर (UID), जैसे- आधार कार्ड, पास्पोर्ट, डाइविंग लाइसेन्स और वोटर आईडी कार्ड।
  • पैन कार्ड
  • पहचान पत्र जिसमें आपकी फ़ोटो हो और जो किसी भी स्टैचुटॉरी या रेग्युलटॉरी अथॉरिटीज़ (Statutory/Regulatory Authorities), सेंट्रल या स्टेट गवर्न्मेंट (Central/State Government) और उनके अन्य किन्हीं विभागों द्वारा जारी की गयी हो।
  • वे पहचान पत्र जो सेडूल्ड कमर्शीयल बैंकों (Scheduled Commercial Banks), पब्लिक सेक्टर अंडर्टेकिंग (Public Sector Undertakings) और पब्लिक फ़ायनैन्शल इन्स्टिटूशन (Public Financial Institutions) द्वारा जारी किए गए हों।
  • विश्वविद्यालय द्वारा अफ़िलीयट (affiliate) पहचान पत्र जो कॉलेजों से जारी किया जाता है या फिर पर्सनल संस्थान जैसे आईसीएआई (ICAI), आईसीडब्लूएआई (ICWAI), आईसीएसआई (ICSI) और बार काउन्सिल (Bar Council) द्वारा उनके सदस्यों को जारी किया जाता है, वे भी KYC प्रक्रिया के लिए मान्य हैं।

प्रूफ़ ऑफ ऐड्रेस (Proof of Address) के लिए ज़रूरी डॉक्युमेंट निम्न हैं:

  • पास्पोर्ट, मतदाता पहचान पत्र (Voter Id Card), रेजिस्टर्ड सेल या लीस अग्रीमेंट (Registered Sale or Lease Agreement), राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेन्स, इन्शुरन्स के दस्तावेज की कॉपी या फ़्लैट मेंनटेनेंस बिल (Flat Maintenance Bill) इत्यादि।
  • उपयोगिता बिल (Utility Bills), जैसे- लैंडलाइन टेलेफ़ोन बिल, गैस बिल या बिजली बिल (तीन महीने से ज़्यादा पुराना नहीं)।
  • बैंक खाता स्टेट्मेंट या पैस्बुक एंट्रीज़ (तीन महीने से ज़्यादा पुराना नहीं)।
  • उच्च तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा सेल्फ़-डेक्लरेशन पत्र (Self-Declaration Letter), जिसमें उनका नए पता का उल्लेख हो।

निम्नलिखित किसी भी संस्थान द्वारा जारी किया गया निवास का प्रमाण:

1) सेडूल्ड कमर्शीयल बैंकों (Scheduled Commercial Banks) के बैंक प्रबंधक

2) बहुराष्ट्रीय विदेशी बैंक (Multinational Foreign Bank)

3) सेडूल्ड को-ऑपरेटिव बैंक (Scheduled Co-Operative Bank)

4) लेजिस्लेटिव असेम्ब्ली (Legislative Assembly) के चुने हुए प्रतिनिधि

5) गज़ेटेड ऑफ़िसर (Gazetted Officer)

6) नोटरी पब्लिक (Notary Public)

7) सांसद (Parliament)

8) सरकार तथा किसी भी स्टैचुटॉरी अथॉरिटी (Statutory Authority) द्वारा जारी किए गए दस्तावेज

9) केंद्र या राज्य सरकार और उनके विभागों, स्टैचुटॉरी या रेग्युलटॉरी अथॉरिटीज़, सेडूल्ड कमर्शीयल बैंकों, पब्लिक सेक्टर अंडर्टेकिंग्स, पब्लिक फ़ायनैन्शल संस्थाओं और कॉलेजों अफ़िलीएटेड संस्थान जैसे आईसीएआई, आईसीडब्ल्यूएआई, बार काउन्सिल और आईसीएसआई द्वारा उनके सदस्यों के लिए जारी किया गया।

केवाईसी कितने प्रकार के होते हैं? (What are the Types of KYC)

Types of KYC – अब जब आप ये समझ चुके हैं कि KYC क्या है और वह कब आवश्यक है, तो अब आपको यह भी जान लेना चाहिए कि भारत में कितने प्रकार के KYC उपलब्ध हैं।आइए विभिन्न प्रकार के KYC को समझते हैं:

() आधार कार्ड पर आधारित केवाईसी (eKYC)

() ऑफलाइन केवाईसी या इनपर्सनवेरिफ़िकेशन (IPV) केवाईसी

आधार कार्ड पर आधारित केवाईसी की मदद से आप म्यूचूअल फंड में प्रति वर्ष केवल ५०,००० रुपय का निवेश कर सकते हैं, और यदि आप प्रति वित्तीय वर्ष ५०,००० रुपये से अधिक का निवेश करना चाहते हैं, तो आपके लिए ऑफलाइन इन-पर्सन केवाईसी को भी पूरा करना अनिवार्य होता है।

भारत में केवाईसी कैसे करें? (How to do KYC in India)

 KYC Process Steps – आप नीचे बताए गए निर्देशो का पालन करके आधार कार्ड आधारित केवाईसी और ऑफलाइन केवाईसी आसानी से पूरी कर सकते हैं:

आधार कार्ड आधारित केवाईसी या ऑनलाइन केवाईसी कैसे करें? (How to do Aadhaar based KYC or Online KYC?)

  • आप रेजिस्टर्ड केवाईसी रेजिस्ट्रेशन एजेन्सी के ऑफिसीयल वेब्सायट पर अकाउंट बना कर वहाँ अपना विवरण जैसे- नाम, जन्म-तिथि और पता भरें।
  • अपना आधार कार्ड नम्बर, रेजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर प्रदान करें और सभी विवरणों को ओटीपी (OTP) की सहायता से वेरिफ़ाई करें।
  • अंत में ई-केवाईसी को पूरा करने के लिए ई-आधार कार्ड की एक प्रति अपलोड करें और डेक्लरेशन टर्म्ज़ एंड कंडिशंज़ को स्वीकार करें।

ऑफलाइन केवाईसी इन-पर्सन-वेरिफ़िकेशन (IPV) केवाईसी कैसे पूरा करें? (How to do KYC Offline?)

  • सबसे पहले बैंक या बीमा कम्पनी के वेब्सायट से केवाईसी फ़ॉर्म डाउनलोड करें और उसमें अपने बारे में सारी जानकारी भरें।
  • भरे हुए फ़ॉर्म पर हस्ताक्षर करें और फ़ॉर्म को किसी भी रेलिवेंट अथॉरिटीज़ (Relevant Authorities) के पास जमा करें।
  • फ़ॉर्म के साथ आप अपने अटेस्टेड निवास प्रमाण, आईडी प्रमाण और अपनी एक पास्पोर्ट साइज़ की फ़ोटो जमा करें।

आपको अपना केवाईसी क्यों करना चाहिए? (Why Should I Carry out my KYC)

 अब जब आप केवाईसी वेरिफ़िकेशन के अर्थ, महत्व और प्रकारों को समझ चुके हैं, तो अब हम यह समझेंगे कि आपको अपना केवाईसी क्यों करना चाहिए। किसी भी वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवाईसी अनिवार्य होता है।

जब आप अपनी केवाईसी की प्रक्रिया को पूरी कर लेते हैं, तो आप अपने वित्तीय संस्थान को दिये गए पहचान, पता और वित्तीय इतिहास के सत्यता की पुष्टि करते हैं, जो किसी भी प्रकार के लेन-देन के लिए बहुत आवश्यक है। इससे बैंकों को यह जानने में मदद मिलती है कि आपने जो पैसे निवेश के लिए चुने हैं वे किसी अवैध या मनी लॉंडरिंग के उद्देश्य को पूरा करने के लिए नहीं है।

वही दूसरी ओर, अगर हम तार्किक कारण भी देखे तो यह सम्भव नहीं है कि बिना KYC के कोई बैंक आपका खाता खोले और ब्रोकरेज आपका डीमैट या ट्रेडिंग खाता खोले, इसके अलावा कोई भी फ़ायनैन्शल संस्थान आपको उनके प्लाट्फ़ॉर्म पर किसी भी प्रकार के लेन-देन की अनुमति नहीं देगा। यह भी निश्चित है कि अगर आप किसी भी तरह का लोन (Loan) लेना चाहते हैं, म्यूचूअल फंड में निवेश करना चाहते हैं, फ़िक्स्ट डिपॉज़िट में निवेश करना चाहते हैं, शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करना चाहते हैं या किसी भी और वित्तीय लेनदेन से सम्बंधित कोई भी कार्य करना चाहते हैं तो उसके लिए KYC का पूरा होना अत्यावश्यक है।

विशेषतः म्यूचूअल फंड के सम्बंध में यह भी ध्यान रखने योग्य बात है कि ई-केवाईसी होने के बाद भी फंड हाउस आपसे इन-पर्सन केवाईसी की भी माँग कर सकते हैं। और इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको केवल फंड हाउस के केवाईसी इग्ज़ेक्युटिव के साथ एक विडीओ कॉल पर अपना पहचान तथा पते का प्रमाण पत्र दिखाने की आवश्यकता होती है।

यह इन-पर्सन वेरिफ़िकेशन एक बार की जाती है जो कि निवेशक को प्रत्येक वर्ष व्यापार करने की स्वतंत्रता प्रदान करती है, तथा आपको यह केवाईसी वेरिफ़िकेशन सिर्फ़ उसी सूरत में दोबारा करने की आवश्यकता हो सकती है जब आपको आपके द्वारा दी हुई जानकारी में कुछ नयी जानकारी अप्डेट करनी हो। जैसे कि अगर आप क़ानूनी तौर पर अपना नाम बदले या किसी नए पते पर शिफ़्ट होते हैं तो आपको आपके म्यूचूअल फंड KYC को अप्डेट करने की आवश्यकता होती है, जैसे किसी भी अन्य वित्तीय लेनदेन के लिए आप करते हैं।

केवाईसी क्या है? (What is e-KYC)

पहले ग्राहकों को बैंकों की शाखा में जा कर अपनी केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होता था, परंतु अब ग्राहक इस प्रक्रिया को इलेक्ट्रानिक्ली और ऑनलाइन (Electronically and Online) पूरा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (Electronic Know Your Customer) के रूप में भी जानी जाती है तथा यह एक कागज रहित (Paperless) बहुत ही आसान और तेजी से होने वाली प्रक्रिया है।

ईकेवाईसी बनाम ओकेवाईसी बनाम सीकेवाईसी (eKYC vs. oKYC vs. CKYC)

 पहले ग्राहकों को बैंकों की शाखा में जा कर अपनी केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होता था, परंतु अब ग्राहक इस प्रक्रिया को इलेक्ट्रानिक्ली और ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (Electronic Know Your Customer) या केवाईसी (eKYC) के रूप में भी जानी जाती है तथा यह एक कागज रहित (Paperless) बहुत ही आसान और तेजी से होने वाली प्रक्रिया है।

ऑफलाइन नो योर कस्टमर या ओकेवाईसी (Offline Know Your Customer or oKYC) आधार कार्ड आधारित होती है और यह ई-केवाईसी के विपरीत होता है। यह प्रक्रिया ना ही इन-पर्सन वेरिफ़िकेशन की तरह होती है और ना ही यह सीधे यूआईडीएआई (UIDAI) के डेटबेस तक पहुँचती है।

ओ-केवाईसी या तो ऑफलाइन आधार एक्सएमएल (XML) या क्यूआर कोड (QR code) के माध्यम से लोगों के विवरण उन फ़ायनैन्शल इंस्टिट्युसन के साथ साझा करने की अनुमति देती है, जिन्हें केवाईसी की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया भी ई-केवाईसी की ही तरह तेज है पर यह ग्राहकों को अधिक गोपनीयता (Privacy) प्रदान करती है। इस प्रक्रिया के लिए आधार के फोटोकॉपी की आवश्यकता नहीं होती है।

सीकेवाईसी या सेंट्रल नो योर कस्टमर (CKYC or Central Know Your Customer), ग्राहकों के सभी केवाईसी रिकॉर्ड का एक केंद्रीय डेटाबेस है। यही कारण है कि ग्राहकों को हर बार हर संस्थान के लिए अलग से केवाईसी पूरा करने की जरूरत नहीं होती है।

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 भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनिवार्य किए जाने के कारण केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करना आवश्यक हो गया है। सभी फ़ायनैन्शल संस्थानों जैसे कि बैंक और जीवन बीमा कंपनियों के पास विस्तृत केवाईसी फॉर्म होते हैं जो महत्वपूर्ण ग्राहक जानकारी हासिल करने में मदद करते हैं, जिसमें उनके नाम, संपर्क नंबर, पते और बैंक विवरण शामिल होता हैं।

अतः आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपकी केवाईसी प्रक्रिया सभी संबंधित फ़ायनैन्शल संस्थान के साथ पूरी हो चुकी हो, ताकि आप बिना किसी परेशानी के उनकी सेवाओं का उपयोग शुरू कर सकें।

निष्कर्ष (Conclusion) 

केवाईसी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो वित्तीय धोखाधड़ी, काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में मदद करते हुए सभी वित्तीय लेनदेन और खरीदारी को वैध बनाती है। प्रक्रिया अत्यंत सरल और तेजी से होने वाली है तथा सरकारी नियमों के अनुसार अनिवार्य है।

आज हमने देखा कि KYC full form in hindi आगे हम ऐसे और भी रोचक टॉपिक आपके लिए लाते रहेंगे । आपको ये आर्टिकल कैसा लगा हमे बताएं। हमे आपके सुझाव एवं कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा। बने रहिये apneebachat.com पर।

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