Loans

Home Loan Interest Type (Fixed or Floating) in Hindi

Home Loan Interest Type (Fixed or Floating) in Hindi

भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना पर आप फिक्स्ड प्लान लेते हैं तो ठीक है। लेकिन ब्याज दरें कम होने पर अपना लोन फ्लोटिंग में बदलकर सस्ते ब्याज का लाभ उठा सकते हैं। प्लान बदलने की सुविधा एक बार ही मिलती है।

होम लोन इंटरेस्ट टाइप क्या है

जिस दिन आपके नाम पर लोन की रकम या उसका चेक जारी होता है, उसी दिन से आपके नाम पर ब्याज का मीटर शुरू हो जाता है। यदि आपने 15 वर्ष का लोन लिया है तो शुरू के पांच वर्ष तक आपके द्वारा भरी जा रही कि स्त का ज्यादातर रुपया ब्याज चुकाने में चला जाता है। होम लोन स्वीकृत करने से पहले बैंक द्वारा आपको ब्याज के दो विकल्प बताए जाते हैं। एक फ्लोटिंग, दूसरा फिक्स इंट्रेस्ट। इनमें से कोई एक प्लान ले ने से पहले इनके बीच का अंतर समझ लेना चाहिए। फिक्स्ड प्लान में ब्याज दरें पहले से तय होती हैं। फ्लोटिंग में इंट्रेस्ट रेट बदलता रहता है। एक बात और, आप फिक्स्ड रेट पर लोन लेते हैं तो ध्या न रखें कि बैंक पूरी लोन अवधि के लिए फिक्स्ड रेट नहीं रखते। बाद में बैंक इसे फ्लोटिंग में बदल देते हैं। इसलिए लोन ले ने से पहले पूछ लें कि कि तने वर्ष तक फिक्स्ड रहेगा। कई बार बैंक फिक्स्ड रेट पर लोन देते हैं, लेकिन एक क्लॉ ज लगाकर लिख देते हैं कि आने वाले महीनों में ब्या ज दरों में निर्धारित सीमा से ज्यादा बढ़ोतरी होती है तो बची लोन राशि पर फ्लोटिंग रेट से ब्याज लिया जाएगा।

दोनों प्लान का अंतर

फिक्स्ड इंट्रेस्ट : तय ब्याज दर पर लोन मिलता है जो अंति म कि स्त तक लागू रहता है। रेपो में उतार-चढ़ाव पर यह बदलता नहीं है। लोन अवधि की शुरुआत में हर महीने दी जाने वाली किस्त का ज्यादातर हिस्सा ब्याज भरने में जाता है, जबकि आखिर के महीनों में प्रिंसिपल अमाउंट भरा जाता है।

फायदा/नुकसान :

फायदा– भविष्य में ब्याज दर बढ़ी तो आप पर तत्कालिक असर नहीं होगा।

नुकसान– इसकी दर फ्लोटिंग रेट से 1 से 3% ज्यादा रहती है। दूसरा, ब्याज दर कम हो जाए तो उसका फायदा आपको नहीं मिलेगा। इसलिए प्लान लेने से पहले आपको ध्यान रखना होगा कि रेट हमेशा के लिए फिक्स है या कुछ समय के लिए।

फ्लोटिंग इंट्रेस्ट : फिक्स्ड इंट्रेस्ट रेट से उलट फ्लोटिंग रेट ऑफ इंट्रेस्ट बदलता रहता है। कभी यह फिक्स्ड इंट्रेस्ट रेट से 1 से 3% तक कम रहता है, तो कभी इससे ज्यादा भी हो सकता है। मार्केट में उतार-चढ़ाव आरबीआई के रेपो रेट में कमी का इस ब्याज दर पर असर नहीं होता।

फायदा/नुकसान : फिक्स्ड रेट से कम रेट होना इसका सबसे बड़ा फायदा है। ऐसा भी होता है कि फ्लोटिंग, फिक्स्ड से ऊपर चला जाए, लेकिन यह अस्थायी होकर कुछ समय बाद कम हो जाता है। नुकसान यह है कि यदि आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी करता है तो बैंक भी ब्या ज दरें बढ़ा देते हैं, जिसका असर आपकी ईएमआई पर पड़ता है।

लोन अकाउंट सैलरी खाते से जोड़ें

आपके कई बैंक खाते हैं और आप तय नहीं कर पा रहे कि आप होम लोन को किस खाते से जोड़ें, तो आपके लिए सैलरी अकाउंट सबसे अच्छा विकल्प होगा। इसमें ईएमआई का मैनेजमेंट भी अच्छी तरह चलता रहेगा। तय तारीख पर सैलरी मिलेगी और उसी सप्ताह में आपकी किस्त भी उसमें से कट जाएगी। वैसे भी बैंक सैलरी खाते पर आकर्षक ब्याज दरें ऑफर करते रहते हैं।

आज की पोस्ट में हमने Home Loan Interest Type (Fixed or Floating) समझा, अगली पोस्ट में हम होम लोन से जुडी कुछ और महत्वपूर्ण पोस्ट देखेंगे|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *