Health Insurance Claim Ratio – Policy lene se pehle jaroor dekhe

by team apneebachat
Health Insurance Claim Ratio – Policy lene se pehle jaroor dekhe

Claim Ratio – Policy lene se pehle claim ratio jaroor dekhe – जब हम Health Insurance Policy खरीदते हैं, तो प्राय पॉलीसी किसी एजेंट से खरीदते है, (वैसे लोग अब online पॉलीसी भी लेने खरीदने लगे है) और उसमे भी बहुत से लोग कहे सुने के आधार पर पॉलीसी खरीद लेते है। आप पालिसी कैसे भी ख़रीदे लेकिन ये प्रश्न आपके मन में जरूर आने चाहिए :

1. जरुरत पढने पर पॉलीसी हमारे कम आएगी भी या नही?
2. इंश्योरंस कंपनी, जरुरत पड़ने पर कितनो को हेल्थ इंश्योरंस का फायदा देती है? और ये आपको पॉलीसी का क्लेम रेश्यो देखने से पता चलेगा।

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क्लेम रेश्यो क्या है?

Claims Ratio kya hai/What is Claims Ratio? – स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय, ग्राहकों को एक doubt रहता है, कि मुश्किल समय में हमे बीमा कंपनी claim का settlement करेगी या नहीं। इसे समझने का सबसे आसान  तरीका है, कंपनी का claim ratio, के बारे में विस्तार से पढ़े।

क्लेम रेश्यो के प्रकार?

Types of Claim Ratios/Claim Ratio ke Prakaar – दो प्रकार के claim ratio हैं जो आपको स्वास्थ्य बीमा में निवेश करने से पहले पता होना चाहिए। इनमें  Claim Settlement Ratio and Claim Incurred Ratio शामिल हैं।

  • Claim Settlement Ratio दावा निपटान अनुपात

Claim Settlement Ratio or CSR वह ratio या अनुपात है जिसमे एक particular financial period में दायर कुल claims के against एक स्वास्थ्य बीमा कंपनी द्वारा कितने claims को settle किया गया है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी को 100 दावे मिले हैं और वह 70 दावों को मंजूरी देती है, तो उसका Claim Settlement Ratio (दावा निपटान अनुपात) 70% होगा। अन्य 30% बीमा कंपनी द्वारा Pending (लंबित) या  Rejected (अस्वीकृत) होंगे।

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एक high claim settlement ratio उच्च दावा निपटान अनुपात को अच्छा माना जाता है क्योंकि यह बताता है कि स्वास्थ्य बीमा कंपनी का दावा निपटान प्रक्रिया दूसरी बीमा कंपनियों की तुलना में काफी मजबूत है।

ध्यान देने वाली बात ये है  कि स्वास्थ्य बीमा कंपनी के लिए Claim Settlement Ratio 100% से अधिक नहीं हो सकता है।

  • Claim Incurred Ratio दावा किया गया अनुपात

Claim Incurred Ratio (दावा किया गया अनुपात) or Incurred Claim Ratio or ICR (आईसीआर) किसी फाइनेंसियल पीरियड के दौरान प्राप्त प्रीमियम की कुल राशि (total amount of premiums) के विरुद्ध भुगतान किए गए दावों का रेश्यो (अनुपात) है।

उदाहरण के लिए, यदि स्वास्थ्य बीमा कंपनी ने 100 करोड़ के प्रीमियम आने पर 80 करोड़ रुपये के claims approve किये।  तो इस सूरत में  Incurred Claim Ratio (दावा किया गया अनुपात) 80% होगा।

कम अनुमानित दावा अनुपात (Incurred Claim Ratio) बताता है कि स्वास्थ्य बीमा कंपनी की claim settlement process अत्यधिक कठोर है। ध्यान दें कि एक उच्च ICR या 100% से अधिक ICR के साथ एक स्वास्थ्य बीमा कंपनी कई के लिए संदेह का कारण बन जाती है। इसके पीछे का कारण सरल है।

Further Reading – Steps – Health Insurance claim Settlement Kaise kare?

आईसीआर किसी बीमा कंपनी के दावों के भुगतान करने की क्षमता को दर्शाता है। यदि कोई स्वास्थ्य बीमा कंपनी प्रीमियम के रूप में एकत्र की गई राशि की तुलना में अधिक राशि का claim करती है, तो उस कंपनी को अपने आप को मार्केट में बनाए रखना मुश्किल होगा, और फिर उसके बदले में कंपनी ये कदम उठा सकती है:

1. कंपनी claims का रिजेक्शनस का percentage बढ़ा सकती है।
2. Premium कि कीमते बढ़ाना।
3. कंपनी अपने insurance प्रोडक्ट में बदलाव कर सकती है।

पॉलिसी चुनने से पहले क्लेम रेशो जरूर देखे

अस्पताल में भर्ती होने के दौरान किए गए खर्चों के विरुद्ध आपकी और आपके परिवार की आर्थिक रक्षा करने वाली योजना है  Health Insurance स्वास्थ्य बीमा। यह पॉलिसी आप अपनी जरूरतों और बजट के अनुरूप ले सकते हैं।

जीवनशैली में परिवर्तन, प्रदूषित वातावरण के साथ ही खान-पान में अनियमितता के चलते आज हर व्यक्ति किसी न किसी छोटी-बड़ी बीमारी से ग्रस्त है। यदि आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस है तो इलाज कराने में जेब से पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे।

Health Insurance,  इसे लेने वाले को बीमारी, दुर्घटना या मृत्यु आदि स्थिति में आर्थिक सहायता देता है। आप किसी भी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले यह जरूर चेक कर लें कि उस कंपनी का क्लेम रेशो क्या है। यानी वह कंपनी कितने प्रतिशत पालिसीधारकों का क्लेम मंजूर करती है।

यदि आपको हेल्थ इंश्योरेंस चाहिए तो कितने हजार या लाख रुपए की कीमत के बीमा कवर की आपको आवश्यकता है, इसका भी आकलन कर लेना चाहिए। यदि गंभीर रोग के लिए बीमा कवर लेना चाहते हैं तो यह भी जरूर पता कर लें कि कौन-कौन सी बीमारियों का बीमा कितने रुपए में कवर होता है और सालाना कितनी राशि प्रीमियम के रूप में आपको जमा करनी पड़ सकती है।

वैसे स्पिलिटिंग पॉलिसी आपके लिए लाभदायक हो सकती है। कीमत के लिहाज से, परिवार के सबसे बड़े सदस्य के लिए अलग से पॉलिसी ली जा सकती है।

वैसे सामान्यत: सभी बीमा कंपनियां बीमाधारक के साथ, उसकी पत्नी व दो बच्चों को एक ही पॉलिसी में कवर करती हैं। वहीं, कुछ पॉलिसी में आप पर आश्रित माता-पिता को भी कवर किया जाता है, लेकिन उसकी सालाना प्रीमियम काफी अधिक होती है। यह प्रीमियम उम्र के पड़ाव के हिसाब से अलग-अलग होती है।

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कैसे होता है क्लेम रेश्यो का निर्धारण?

How is the claim ratio determined? – पॉलिसी की टोटल कवरेज कीमत का निर्धारण, परिवार के लोगों की संख्या (जिन्हें इस पॉलिसी के माध्यम से कवर करना है), धारक की बीमारी, साथ ही वर्तमान में विभिन्न स्रोतों से मिलने वाले कवरेज को ध्यान में रखकर होती है।

पॉलिसी लेने वाले के लिए यह जरूरी है कि वह परिवार के लिए ली जाने वाली पॉलिसी के साथ, स्वयं की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी भी खरीदे।

वेतनभोगी लोगों को यह बताना जरूरी है कि उनके ऑफिस द्वारा दिया जाने वाला हेल्थ इंश्योरेंस तभी तक मान्य होता है, जब तक वह वहां नौकरी कर रहा होता है।

क्यों जरूरी है यह स्कीम?

Why is this scheme important? – हर कोई व्यक्ति विभिन्न तरह के स्वास्थ्य खतरों से घिरा हुआ है। यदि आपके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है और आप अस्पताल में भर्ती किए जाते हैं, तो ऐसी स्थिति में आपको अपनी जेब से भारी बिलों का भुगतान करना पड़ सकता है।

इसका मतलब साफ है कि आपकी बचत शून्य हो जाएगी। यदि आपके पास इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं, तो आपको अपना उपचार कराने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य बीमा आपके बचाव में, आपकी आर्थिक सहायता के रूप में सामने आता है।

एक अच्छा क्लेम रेश्यो क्या होता है?

Accha Claim Ratio Kya Hota hai/What is a good claim ratio? –75% से 90% के बीच Incurred Claim Ratio वाली एक कंपनी को perfect कंपनी कहा जा सकता है। क्योंकि यह दर्शाता है कि कंपनी लाभ कमाने के साथ साथ, गुणात्मक उत्पाद (qualitative product) की पेशकश कर रही है, और एक ही समय में ग्राहकों की अपेक्षाओं को भी पूरा कर रही है।

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निम्न तालिका में भारत कि 10 प्रमुख  बीमा कंपनियों के Claim Settlement Ratio को दिखाया गया है:

निम्न तालिका में भारत कि 10 प्रमुख  बीमा कंपनियों के Incurred Claim Ratio को दिखाया गया है:

निष्कर्ष

व्यक्ति स्वास्थ्य बीमा लेता है ताकि वह health issues के दौरान वित्तीय जोखिम से सुरक्षित रहे। और यदि कोई बीमाकर्ता अपने claim settle/process करने में देरी करता है, तो फिर स्वास्थ्य बीमा खरीदने का फायदा क्या होगा।

इसलिए स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय बीमा कंपनी का चयन बहुत से सावधानी से करना चाहिए। Claim Settlement Ratio और Incurred Claim Ratio and हमारे निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते है।

स्वास्थ्य बीमा एक जरूरी है, लेकिन इसे समझदारी और सावधानी से लिया जाना चाहिए। एक कंपनी जरुरत से अधिक लाभ का वादा करती है उसकी अच्छे से पड़ताल करना चाहिए, और अगर कुछ संदेहास्पद लगे तो उसे अपनी लिस्ट से तुरंत हटा देना जाना चाहिए। जबकि claim process में देरी और claim amount पर अत्यधिक मोल भाव करने वाली कंपनियों से बचना चाहिए।

स्वास्थ्य बीमा खरीदने के लिए आपकी पसंद पूरी तरह से उस वादे और कंपनी कि विश्वसनीयता पर निर्भर करती है जो एक बीमाकर्ता करता अपने ग्राहक से करता है|

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